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पर्यटन में ‘ब्रांड मोदी’

किसी स्थान के प्रति आकर्षण पर्यटन की पहली शर्त है। घरेलू हो या विदेशी, दोनों ही भारत के बदलते परिवेश के प्रति आकर्षित हैं। आंकड़ों से यह बात साफ है कि भारत में पर्यटन और उससे जुड़े रोजगार में पर्याप्त बढ़ोतरी हुई है।

जाहिर है कि इसमें मोदी सरकार की बहुत बड़ी भूमिका है। व्यक्तिगत तौर पर और साथ ही सरकारी नीतियों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

हम इस बात को बहुत ही आसानी से समझ सकते हैं। रेडियो पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने अभी कुछ सप्ताह पहले ही … Read More

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ज़ल्द ही भारत में बना कपड़ा पहनेगी दुनिया

विकास और आर्थिक सुधारों के इस दौर में आज भारत पूरी दुनिया को एक नया आकार देने के लिए एक प्रमुख शक्ति बनकर उभर रहा है। इसी दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए कैबिनेट ने कपड़ा उद्योग में भी 6,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंज़ूरी दे दी है। इस निवेश से न सिर्फ अगले तीन वर्षों में भारत में एक करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा होंगे बल्कि भारत पूरी दुनिया का तन ढकने के लिए भी एक मजबूत स्थिति में आकर खड़ा हो जायेगा।

प्रधानमन्त्री मोदी के नेतृत्व में भारत पहले से ही विश्व की प्रतिस्पर्धी … Read More

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राजनीतिक स्वार्थ और सस्ती लोकप्रियता के लिए, राष्ट्रवादी भावना को आघात पहुंचाने की प्रवृत्ति

अभी हाल ही में हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस बात का हवाला भी दिया कि ऐसी किसी बात का वर्णन संविधान में नहीं किया गया है। यह बात सही है कि उन्हें ऐसा करने लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। लेकिन क्या केवल इसी कारण से वह चुन–चुनकर हर ऐसा कार्य करेंगे, जिससे राष्ट्रवाद की भावना को ठेस पहुंचे?

शायद ओवैसी जैसे लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि संविधान में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनका शब्दश: उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन उसकी व्याख्या … Read More

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सरकारी कंपनियों के अच्छे दिन

पिछले लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से अच्छे दिन लाने का वादा किया था। जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानसेवक बने हैं, उन्होंने पूरी मेहनत और लगन के साथ अच्छे दिनों को लाने में दिन–रात एक कर दी है। हमेशा घाटे में चलने वाली कंपनियों को मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनियां बना दिया है।

दरअसल, दो साल पहले कुछ सरकारी कंपनियों की हालत यह थी कि जाने–माने अर्थशास्त्रियों तक ने उन्हें बंद करने का सुझाव दिया था। उस समय नरेन्द्र मोदी के पास दो विकल्प थे, एक या तो वो घाटे में चल रही कंपनियों को बंद … Read More

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कांग्रेस, कन्हैया और ‘कुर्सी’ का संकट

एक लोकतांत्रिक देश में राजनीतिक दलों का बहुत महत्व है. फिलहाल भाजपा की केंद्र में सरकार है, और कांग्रेस एक लंबे शासन के बाद विपक्ष की भूमिका में है. होना यह चाहिए था कि कांग्रेस नीतिगत आलोचना के द्वारा एक स्वस्थ विपक्ष की भूमिका निभाती, लेकिन परिस्थितियां ऐसी नहीं लग रही हैं. एक पार्टी के तौर पर कांग्रेस लड़खड़ा रही है और खुद पतन की राह पर आगे बढ़ रही है. अब देखते हैं कि ऐसी नौबत क्यों आई? कांग्रेस की सबसे बड़ी दुविधा यह है कि उसे ‘कुर्सी’ यानि सत्ता की आदत है, और वह इस दूरी को बर्दाश्त … Read More