सातवां वेतन आयोग और अर्थव्यवस्था

सातवें वेतन आयोग को लागू करने की मंजूरी देकर सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है। दुनिया भर में चल रही आर्थिक मंदी के बीच भारत की अर्थव्यवस्था सुचारु रूप से चलते हुए फल–फूल ही नहीं रही है बल्कि दूसरे देशों को भी विकास का हौसला दे रही है। यही कारण है कि सरकार विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर पाने में कामयाब रही है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया‘ और ‘स्टार्ट–अप इंडिया‘ जैसे महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों को पाने के लिए अर्थव्यवस्था का स्वस्थ और सुदृढ़ रूप से कार्य करते रहना बेहद ज़रूरी है।

देश भर में लगभग एक करोड़ कर्मचरियों का वेतन और पेंशन बढ़ाकर सरकार न सिर्फ इन कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बेहतर कर रही है बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से नाज़ुक दौर से गुज़र रहे भारतीय बैंकिंग सिस्टम, लघु और मध्यम उद्योगों, रियल एस्टेट सेक्टर, ऑटोमोबाइल उद्योग जैसे कई छोटे–बड़े उद्योगों को भी सशक्त बनाने में मदद कर रही है।

सातवें आयोग के लागू हो जाने के बाद वेतन में होने वाली बढ़ोतरी का कर्मचारियों के लिए फायदेमंद साबित होना स्वाभाविक है क्योंकि ज़्यादा आमदनी उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मददगार होगी, वे अच्छी गुणवत्ता वाली चीज़ों का इस्तेमाल कर पाएंगे जो कि अब तक उनकी पहुंच से बाहर थी।

लोगों की खरीद शक्ति बढ़ने से बाजार में चीज़ों की मांग बढ़ेगी जिसके लिए आपूर्ति को बढ़ाना होगा। आपूर्ति को बढ़ाने के लिए उत्पादन बढ़ेगा और उत्पादन बढ़ने से औद्योगिक क्षेत्रों को फायदा तो होगा ही साथ ही इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ने की गुंजाइश भी बढ़ जाएगी। इस प्रकार कहा जा सकता है कि लोगों की जेब के ज़रिये सरकार बाज़ार में पैसा पहुंचाकर अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के साथ ही रोजगार को भी बढ़ावा देने का काम भी कर रही है।

काले धन और “बैड लोन्स” के चलते भारतीय बैंकों की हालत उतनी अच्छी नहीं है, राज्यों में बैंक उद्योगों को उधार देने से कतरा रहे हैं। वेतन के लगभग ढाई गुना बढ़ने से कर्मचारी अपनी ज़रूरतों पर खर्च करने के बाद भी अपनी आय का कुछ हिस्सा बचा पाएंगे, जिससे आर्थिक संस्थानों के पास जमा राशि में बढ़ोतरी होगी। बैंकों की उधार देने की क्षमता बढ़ेगी जिससे उद्योग समर्थ हो पाएंगे, रोजगार और व्यापार भी बढ़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए बैंकिंग सिस्टम की बेहतरी विशेष रूप से अच्छे परिणाम लेकर आ सकती है।

कर्मचारियों के वेतन बढ़ने का सकारात्मक प्रभाव रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ने की उम्मीद की जा सकती है जो कि मांग में कमी होने और उधार तले दबे होने की वजह से जूझ रहा है। अब तक महंगाई की मार से त्रस्त कर्मचारी बेहतर आमदनी पाकर अपने घर के सपने को पूरा करने का साहस कर सकते हैं। ऑटोमोबाइल उद्योग में भी मांग उछाल पकड़ सकती है क्योंकि इस क्षेत्र में खपत के लिए मध्यम वर्ग का भी काफी हद तक योगदान है।

भारतीय मध्यम वर्ग के लिए जीवन की बुनियादी ज़रूरतों के बाद उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षा सबसे महत्त्वपूर्ण होती है जिसके लिए वे बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने से कतराते नहीं हैं और उसके बाद यह वर्ग जीवन स्तर को सुधारने की ओर ध्यान देता है। वेतन में हुई औसतन 23.5 % की वृद्धि से मध्यम वर्गीय कर्मचारी अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही मनोरंजन, ख़रीददारी, घूमने–फिरने और निवेश करने जैसी ज़रूरतों को भी अच्छी तरह से पूरा करने में सक्षम हो पाएंगे। सरकारी कर्मचारियों को तो पहले से ज़्यादा खुलकर पैसा खर्च करने की आज़ादी मिलेगी ही, ये पैसा अन्य गैर सरकारी मध्यम वर्गीय और कम आय वाले लोगों तक भी पहुंचेगा और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा।

मोदी सरकार के इस फैसले से ‘वन रैंक वन पेंशन‘ के लिए सालों से लड़ रहे सेना के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को विशेष राहत मिली है, सरकार द्वारा सेना के 32 लाख कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया जाएगा जिसमें से 18 लाख पेंशनर हैं। सातवें वेतन आयोग के प्रमुख जस्टिस ए के माथुर के अनुसार ‘वन रैंक वन पेंशन‘ केवल सेना के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि सभी कर्मचारियों पर लागू होगा।

सातवें आयोग की सिफारिशों के जल्द लागू होने की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों को मोदी सरकार की बदौलत ज़्यादा इंतज़ार भी नहीं करना पड़ेगा। छठे वेतन आयोग के लागू होने में लगे 32 महीनों की अपेक्षा इस बार मौजूदा वित्तीय वर्ष के भीतर ही महज छः महीनों में कर्मचारियों तक पैसा पहुंचा दिया जाएगा। सरकार ने फिर से दिखा दिया है कि वह त्वरित गति और निपुणता से अपना कार्य कर रही है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला लोगो की जेबें तो भरेगा ही साथ ही उनकी खरीद शक्ति को बढ़ाएगा। ज़ाहिर तौर पर आसानी से यह तो समझा ही जा सकता है कि एक देश की अर्थव्यवस्था में खरीद शक्ति बढ़ जाने का क्या महत्त्व होता है।

प्रियंका टोडरिया

http://thenamopatrika.com/seveth-pay-commission/

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