जलमार्ग परिवहन – सस्ता, प्रदूषण रहित और सुगम

12 अगस्त 2016 का दिन एक ऐतिहासिक क्षण था, जब सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ‘मारूति सुजुकी इंडिया’ की कारों की पहली खेप को जलमार्ग के जरिए वाराणसी से कोलकाता के लिए झंडी दिखाकर रवाना किया। इस प्रकार भारत में जल-मार्गों के एक नए युग का आरंभ हुआ।

इसके लिए ‘मारूति सुजुकी इंडिया लिमिटेड’ ने IWAI (Inland Waterways Autority Of India) के साथ एक MoU पर पहले ही हस्ताक्षर किए थे, जिससे Inland Vessels के माध्यम से कारों का ट्रांसपोर्टेशन किया जा सके।

दरअसल प्राचीन काल से लेकर अब तक सभी सभ्यताओं का विकास जल-स्रोतों के इर्द-गिर्द ही हुआ है। जल-मार्ग शुरू से ही परिवहन और आवागमन का प्रमुख साधन रहे हैं। वर्तमान में भी यह परिवहन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। प्रधानमंत्री मोदी इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं, इसीलिए उनकी सरकार जल मार्गों पर जोर दे रही है।

पिछली सरकारें परिवहन के ब्रिटिशकालीन पैटर्न का प्रयोग ही करती रही और यातायात के बेहतर विकल्पों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण दुनिया का सर्वोत्तम रिवरलाइन नेटवर्क (Riverline Network) होने के बावजूद देश इस मामले में पिछड़ता गया। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक अगर हम जल मार्गों द्वारा परिवहन की बात करें, तो कुल परिवहन में इसका हिस्सा चीन में 47 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन में 44 प्रतिशत है, वहीं भारत के कुल परिवहन में इसकी हिस्सेदारी 3 प्रतिशत ही रही है।

मौजूदा सरकार इस स्थिति में सुधार ला रही है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने सबसे पहले “National Waterways Bill 2015” में संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 5 से बढ़ाकर 111 करने पर सहमति प्रदान की। इन जलमार्गों की घोषणा होने से IWAI (Inland Waterways Autority Of India) इनका विकास कर सकेगा।

इनका निर्माण होने से सड़कों पर भीड़ में कमी आएगी। यातायात सस्ता होगा, सामानों की आवाजाही की लागत कम आएगी, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सुदूर-क्षेत्र एक दूसरे से आसानी से जुड़ सकेंगे।

विश्व बैंक द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि रेल और सड़क परिवहन की तुलना में जल मार्गों द्वारा यातायात कहीं अधिक किफायती है। क्योंकि इसमें ईंधन की खपत सबसे कम होती है।

अगर पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी देखा जाए तो इसके कई लाभ हैं। सड़क परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की तुलना में इससे लगभग आधा उत्सर्जन ही होता है, इसलिए यह पर्यावरण अनुकूल है।

उद्योग जगत भी जल-मार्गों से होनेवाले लाभ से अनभिज्ञ नहीं है। मारूति सुजुकी इंडिया द्वारा जलमार्गों का उपयोग एक उदाहरण के तौर पर पहले ही सबके सामने है।

जलमार्गों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जुलाई 2016 में, वाणिज्यिक तौर पर दुनिया के सबसे व्यावहारिक, मिसीसिपी के जलमार्गों का दौरा किया। वहां की जलमार्ग प्रणाली में लगभग 40,000 कि.मी. नौगम्य पानी ( Navigable Water) है, जो पूरे उत्तरी अमेरिका को अपने दायरे में लेता है।

इस दौरान गंगा नदी को भी ऐसे ही किफायती तौर पर नौगम्य बनाने के लिए योजना तैयार करने के लिए विचार-विमर्श किया गया। जिससे भारत में भी जलमार्गों के विकास के लिए अच्छी से अच्छी तकनीक का प्रयोग किया जा सके।

कुल मिलाकर जलमार्गों के उपयोग से औद्योगिक वृद्धि होगी और पर्यटन की संभावनाएं बढ़ेंगी। वहीं देश में इससे एक अतिरिक्त, सस्ता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन माध्यम विकसित होगा। मौजूदा सरकार द्वारा इस मामले में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।

SHASHIDHAR UPADHYAY

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