आम आदमी के अच्छे दिन : सस्ती, सुंदर और टिकाऊ उड़ान

प्राचीन काल से एक कहावत चली आ रही है कि “जो होता है अच्छे के लिए होता है।” लेकिन 21वीं सदी में होने के कारण हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि किसी के कहने पर न जाएं और हर बात को क्रॉस चैक करें।

सरकार के द्वारा हाल ही में सिविल एविएशन पॉलिसी को लाया गया है। देश आज़ाद होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि मंत्रालय सिविल एविएशन पॉलिसी को लेकर आया है।

एयरलाइन इंडस्ट्री घाटे में चल रही है, ऐसी खबरें तो आए दिन अखबारों में पढ़ने को मिलती हैं। किसी भी सरकार के द्वारा इस परेशानी का हल करने की कोशिश नहीं की गई। मोदी सरकार में सिविल एविएशन पॉलिसी को एयरलाइन इंडस्ट्री का जीर्णोद्धार करने के लिए लाया गया है।

नई पॉलिसी किस तरह से कारगर सिद्ध होगी, इसके ऊपर एक नज़र दौड़ाते हैं।

अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से

नई पॉलिसी के आने से अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर प़ड़ेगा। सरकार का उद्देश्य है कि वो साल 2022 तक घरेलू टिकटिंग को 08 करोड़ से बढ़ाकर 30 करेगी। जितनी अधिक टिकटिंग बढ़ेगी, उतना अधिक सरकार के पास टैक्स आएगा और उस धन से सरकार लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए खर्च कर सकेगी।

दरअसल, दुनिया में किसी भी अर्थव्यवस्था का आधार टैक्स ही होता है। जहां जितने अधिक करदाता होते हैं, वहां की अर्थव्यवस्था उतनी ही मज़बूत होती है। सरकारों का कार्य होता है कि वो अपनी अर्थव्यवस्था में मांग (डिमांड) पैदा करें, उसके बाद उस डिमांड को पूरा करने के लिए लक्ष्य बनाएं।

किराए की सस्ती दरों से सभी को लाभ

मोदी सरकार की ओर से एक घंटे तक की फ्लाइट के लिए 2,500 रुपये का किराया फिक्स किया गया है। सरकार की दलील है कि वो एयरलाइन को होने वाले घाटे के भरपाई करेगी और इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपेगी। एक तो यह सरकार राज्य सरकारों को साथ लेकर चल रही है, इसके लिए हमें स्वयं को किस्मत वाला समझना चाहिए कि हमें मोदी सरकार मिली है।

एयरपोर्ट बनने से स्थानीय निवासियों को लाभ

सरकार का उद्देश्य है कि नई नीति के तहत वो नए एयरपोर्ट बनाएगी। नए एयरपोर्ट बनने से एक तो वहां पर रोज़गार पैदा करने का काम किया जा सकेगा। यदि एयरपोर्ट नज़दीक होगा तो पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा। पर्यटन से लोगों की आय में बढ़ोतरी होगी। आय बढ़ेगी तो लोगों के भीतर तरह–तरह के उत्पादों की डिमांड बढ़ेगी। डिमांड बढ़ेगी तो उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी तो कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। उपभोक्ताओं को सस्ती से सस्ती दरों पर चीज़ें मुहैया कराई जा सकेंगी। सरकार का खजाना भरेगा। सरकार का खजाना बढ़ेगा तो जनहित में सरकार अधिक से अधिक धन खर्च कर सकेगी। उपरोक्त लिखित सभी बातों से सिद्ध होता है कि सरकार की यह नीति कारगर होगी।

पर्यटन से व्यापक और सुदृढ़ व्यवस्था

हमारा लोकतंत्र इतना मज़बूत है कि यहां की व्यवस्था को साल 2008 में फैली अंतरराष्ट्रीय मंदी तक प्रभावित नहीं कर सकी थी। सिस्टम इतना व्यापक है कि हमारे देश में कोई भी चीज़ किसी एक निर्णय के ऊपर निर्भर नहीं रहती है। मौज़ूदा समय में देखा जाए तो देश के उत्तरी व पूर्वोत्तर के राज्यों में पर्यटन के व्यापक आसार मौज़ूद हैं और लोग वहां पर जाकर वहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनन्द भी उठाना चाहते हैं। बहुत से लोग ऐसे हैं जो कि बेहतर कनेक्टिविटी न होने के कारण वहां पर नहीं जा पाते हैं, लेकिन अब जा सकेंगे।

हमारे देश में पिछले एक दशक में मिडिल क्लास परिवारों की संख्या में बहुत अधिक मात्रा में इज़ाफा हुआ है। कुछ दिन पहले एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसमें खुलासा किया गया था कि देश की केवल 4% जनता ही टैक्स का भुगतान करती है। पिछली सरकार के कार्यकाल तक नए नवेले मध्यमवर्गीय परिवारों और सरकार के बीच काफी गैप था, जो कि लगातार बढ़ता ही जा रहा था। सरकार की यह नीति इस गैप को कम करने के लिए पुल का कार्य करेगी। इस पॉलिसी में एक नहीं बल्कि सिविल एविएशन सेक्टर के 22 क्षेत्रों को कवर किया गया है।

राज्यों की तरक्की का आधार

नई सिविल एविएशन पॉलिसी राज्यों सरकारों की ग्रोथ के लिए भी आधार का काम करेगी। मोदी सरकार में पहले ही राज्यों की भागीदारी को बढ़ा दिया गया है, जिससे कि उनका लाभ वैसे ही बढ़ गया है।

कहते हैं कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है, लेकिन यहां पर राज्य सरकारों के लिए पाने के लिए तो बहुत कुछ है लेकिन राज्यों के पास खोने के नाम पर केवल मुफ्त में पुलिस व फायर सर्विस प्रदान करना है।

 

मोदी सरकार के कार्यकाल में यह वह काम किया गया है जो कि वर्षों तक सराहा जाएगा। एयरपोर्ट के होने से वहां के स्थानीय निवासियों को क्या फायदे होंगे इसका उल्लेख तो पहले ही किया जा चुका है। जब किसी राज्य का कोई व्यक्ति तरक्की करेगा तो वह राज्य कितनी तरक्की करेगा, इस बात को कोई अनपढ़ भी समझ सकता है।

एयरलाइन कंपनियों के दृष्टिकोण से

5/20 की समाप्ति

एयरलाइन कंपनियों को हमेशा से शिकायत रहती थी कि उनके उद्धार के लिए केन्द्र सरकार कुछ नीतियां नहीं लेकर आ रही है। लेकिन अब उनकी इस शिकायत को दूर कर दिया गया है। साल 2004 में एक नियम बनाया गया था जिसके आधार पर 5/20 फॉर्मूला लेकर आया गया था। जिसका मतलब था कि कोई भी एयरलाइन कंपनी केवल तब ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान भर सकती है जबकि उसके पास पांच साल का घरेलू उड़ान का अनुभव हो और कम से कम बीस एयरक्राफ्ट हों।

मोदी सरकार की इस नई नीति में 5/20 के फॉर्मूले को खत्म कर दिया गया है और बीस एयरक्राफ्ट रखने वाली घरेलू कंपनी को अंतरराष्ट्रीय उड़ाने भरने की इजाज़त प्रदान कर दी गई है। ऐसा करने से एक तो कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उनका मुनाफा बढ़ेगा। कंपनियां उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्विस प्रदान कर सकेंगी।

रखरखाव, मरम्मत और जीर्णोद्धार {Maintenance, Repair and Overhaul (MRO)}

नई नीति में एयरक्राफ्टों के रखरखाव, मरम्मत और जीर्णोद्धार के कार्य को विकसित करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं जो कि न केवल भारतीय एयरलाइन कंपनियों को सेवा प्रदान करेंगे बल्कि साउथ एशिया के अन्य देश भी इसका लाभ उठा सकेंगे। इससे राज्य सरकारों को लाभ होगा। एक बात तो साफ है कि इस नीति को लोकलुभावन दृष्टिकोण से नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के दृष्टिकोण से विकसित किया गया है।

इस समय भारत की सिविल एविएशन मार्किट दुनिया में नौंवे स्थान पर आती है और मोदी सरकार के द्वारा साल 2022 तक इसे तीसरे स्थान पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक हमें सुनने को नहीं मिलता था कि देश की अर्थव्यवस्था में सिविल एविएशन इंडस्ट्री का भी कुछ योगदान होता है, यदि मोदी सरकार की इस नीति को सही से क्रियान्वित किया गया तो वो दिन दूर नहीं होगा, जब सिविल एविएशन सेक्टर का देश की ग्रोथ में अहम योगदान होगा।

ओपन स्काई एंड कोड शोयर एग्रीमेंट

मोदी सरकार में सिविल एयरलाइन कंपनियों को “ओपन स्काई एंड कोड शोयर एग्रीमेंट” की इजाज़त प्रदान कर दी है, जो कि उनके लिए संजीवनी साबित होगी। एक एयरलाइन कंपनी अब अपने टिकट को दूसरी एयरलाइन कंपनी के साथ उसी कोड और फ्लाइट नंबर के साथ बिक्री कर सकती हैं। इसे इस तरह से समझा जा सकता हैः– मानकर चलिए किसी एक ऐसी जगह से फ्लाइट उड़ने वाली है जहां पर यात्रियों की संख्या इतनी कम है कि किसी एक फ्लाइट को उड़ाने के लिए एयरलाइन कंपनी को जितना लाभ होना चाहिए, वो भी नहीं अर्जित हो पाएगा, तो ऐसे में कंपनी अपने टिकट को उसी कोड और फ्लाइट नंबर के साथ दूसरी कंपनी को बिक्री कर सकेगी।

सरकार के इस कदम से एयरलाइन कंपनियों के बीच रिश्ते बेहतर होंगे और वो एक दूसरे की सहायता भी कर सकेंगी। पूर्व में कम एयरपोर्ट होने से कम ही जगहें ऐसी थीं जहां पर कि फ्लाइट का सीधा आवागमन नहीं होता था लेकिन अब मोदी सरकार ने फैसला किया है कि वो देश में नए एयरपोर्ट बनाएगी और आवागमन को सुविधाजनक बनाएगी। भारत सरकार का यह निर्णय भी भारत को मज़बूती करेगा कि वो सार्क देशों के साथ “ओपन स्काई एग्रीमेंट” को लेकर बात करेगी। यदि ऐसा होता है तो सार्क देशों में भारत को अधिक महत्व प्रदान किया जाएगा।

निवेश के दृष्टिकोण से

नई नीति से परिणाम भी बेहतर आएंगे। परिणाम बेहतर आएंगे तो स्पष्ट तौर पर समझा जा सकता है कि एयरलाइन कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा। मुनाफा बढ़ेगा तो इस इंडस्ट्री में अधिक से अधिक लोग निवेश करेंगे। घरेलू व अंतरराष्ट्रीय निवेश में बढोतरी होने से निवेशकों का तो लाभ होगा ही, साथ ही इंडस्ट्री को बेहतर बनाया जा सकेगा।

अंत में यह कहा जा सकता है कि यदि सरकार की ओर से इस नीति का सही से क्रियान्वयन किया जाता है तो वास्तव में वर्ष 2027 तक घरेलू टिकटिंग के 50 करोड़ के लक्ष्य को और अंतरराष्ट्रीय टिकटिंग के 20 करोड़ के लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकेगा। सिविल एविएशन सेक्टर में “मेक इन इंडिया” नीति को प्रोमोट करके भारत सरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकती है।

विजय कुमार

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